Hindi Kavita...

मिटटी में दबा दे कि जुदा हो नहीं सकता,
अब इससे ज़यादा मैं तेरा हो नहीं सकता

दहलीज़ पे रख दी हैं किसी सख्श ने ऑंखें

रोशन कभी इतना तो दिया हो नहीं सकता

बस तू मेरी आवाज़ से आवाज़ मिला दे
फिर देख इस शहर में क्या हो नहीं सकता

ऐ मौत मुझे तूने मुसीबत से निकाला
सय्याद समझता था रिहा हो नहीं सकता

इस खाक-ए-बदन को पहुंचा दे वहाँ भी
क्या इतना करम बादे -सबा हो नहीं सकता

पेशानी को सजदे भी अता कर मेरे मौला
आँखों से तो ये क़र्ज़ अता हो नहीं सकता

                     .....मुनव्वर राणा साहब

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 संसद में।
बहुत हुआ अब बन्द करो ये खेल तमाशा संसद में।
बीयर, स्कोच, और रम छोड़ो, पियो दूध बतासा संसद में।

अब बन्द करो छीना धपटी, हो रहा जुआ सा संसद में।
निर्भीक बनो बगुला भगतो, अब जड़ो तमाचा संसद में।

संबिधान की मर्यादा को, धरते उतार तुम संसद में।
नुक्कड़ बाले गुण्डों की है, लम्बी कतार अब संसद में।

में तो कहता हूँ एक वी.आई.पी जेल बनबा भी दो अब संसद में।
कुर्सियाँ हटबा कर सब की सब, गद्दे डलबादो संसद में।

मोबाइल पर ब्लू फिल्म देखो, चोरी-चोरी चुप-चुप के क्यों।
ओपन सेक्स विल पारित कर पर्दे लगबादो संसद में।

मंदिर, मस्जिद, गरुद्वारा भी बनबा ही दो अब संसद में।
कोई आमीन बोले कोई सत श्री अकाल, कोई अलख निरँजन संसद में।

                                                                   .... Ailesh Awasthi
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