-: भ्रुण हत्या :-
;-;-;-;-;-;-;-;-;-;-;-;-
एक स्त्री एक दिन एक स्त्रीरोग
विशेषज्ञ के
पास के गई और बोली,
" डाक्टर मैँ एक गंभीर समस्या मेँ हुँऔर
मेँ
आपकीमदद चाहती हुँ । मैं गर्भवती हूँ, आप किसी को बताइयेगा नही मैने एक
जान
पहचान के सोनोग्राफी लैब से यह
जान लिया है
कि मेरे गर्भ में एक बच्ची है । मै पहले से
एकबेटी की माँ हूँ और मैं किसी भी दशा मे
दो बेटियाँ नहीं चाहती ।"
डाक्टर ने कहा,"ठीक है, तो मेँ
आपकी क्या सहायता कर सकता हु ?"
तो वो स्त्री बोली," मैँ यह चाहती हू
कि इस गर्भ को गिराने मेँ मेरी मदद करें ।"
डाक्टर अनुभवी और समझदार था।
थोडा सोचा और फिर बोला,"मुझे
लगता है कि मेरे
पास एक और सरल रास्ता है
जो आपकी मुश्किल को हल कर देगा।" वो स्त्री बहुत खुश
हुई..
डाक्टर आगे बोला, " हम एक काम करते
है
आप दो बेटियां नही चाहती ना ?? ?
तो पहली बेटी को मार देते है जिससे आप इस
अजन्मी बच्ची को जन्मदे सके और
आपकी समस्या का हल
भी हो जाएगा. वैसे
भी हमको एक बच्ची को मारना है
तो पहले वाली को ही मार देते है ना.?"
तो वो स्त्री तुरंत
बोली"ना ना डाक्टर.".!!!
हत्या करनागुनाह है पाप है और वैसे
भीमैं
अपनी बेटी को बहुत चाहती हूँ । उसको खरोंच
भी आती है तो दर्द का अहसास मुझे
होता है
डाक्टर तुरंत बोला, "पहले
कि हत्या करो या अभी जो जन्मा नही
उसकी हत्या करो दोनो गुनाह है पाप हैं ।"
यह बात उस स्त्री को समझ आ गई । वह
स्वयं
की सोच पर लज्जित हुई और
पश्चाताप करते हुए
घर चली गई । क्या आपको समझ मेँ आयी ?
अगर आई हो तो SHARE करके दुसरे
लोगो को भी समझाने मे मदद
कीजिये
ना महेरबानी. बडी कृपा होगी ।
हो सकता है आपका ही एक shareकिसी की सोच बदल दे..
और एक कन्या भ्रूण सुरक्षित, पूर्ण
विकसित
होकर इस संसारमें जन्म ले
-: बचपन में एक गन्दी आदत :-
बचपन में मेरी एक गन्दी आदत थी, मैं
पापा के पर्स से चुपके
से
कभी कभी पैसे निकाल लेता था। जब
दूसरी कक्षा में
था तो पापा के पर्स के सिक्के वाले हिस्से
से हर सोमवार
को एक रुपैया चुरा के स्कूल के बाहर खोमचे
वाले से WWF
के
पोस्ट-कार्ड खरीदता था।
धीरे धीरे मेरी आदत थोड़ी और बिगड़ी,
जब
पांचवी कक्षा में
था तो बगल में बैठने
वाली लड़की को महीने में एक बार
कैंटीन में
फाउंटेन पेप्सी और समोसा खिलने के लिए
नियमित तरीके
से 11
रुपये चुराने लगा।
...
पिता जी भी इतना ध्यान नहीं देते थे,
उनका पर्स
कभी ढंग से
नहीं रखा रहता था। नोट टेढ़े मेढे पड़े
रहते थे,
पापा कभी गिनते
भी नहीं थे की कितने पैसे हैं पर्स में।
मेरी ये आदत इस वजह
से
कभी टूटी नहीं।
जब मैं दसवी कक्षा में पहुंचा तो मेरे शहर में
पहली बार
मल्टीप्लेक्स खुला। सारे दोस्त लार्ड ऑफ़
द रिंग्स देखने
जा रहे थे। उस दिन मैंने पिता जी के पर्स
से सीधे
दो सौ रुपैये
मारे। फिल्म तो बहुत अच्छी थी, पर उस
दिन अचानक मुझे
लगा की मैं क्या गलत करता जा रहा हूँ।
तीन दिन तक मैंने पापा से नज़र तक
नहीं मिलायी।
पिता जी आज भी इतना ध्यान नहीं देते,
पर्स
अभी भी अस्तव्यस्त रहता है। आज
मेरी नौकरी लग
गयी है,
पिता जी के पर्स से आखिरी बार
पैसा चुराए हुए मुझे दस
साल
से ऊपर हो गए हैं।
अब मेरी नौकरी लग गयी है, और
कभी कभार
पापा की पर्स में
चुपके से एक पांच सौ का नोट डाल देता हूँ .
पापा को पता नहीं चलता, पर मुझे मन
ही मन बहुत सुकून
मिलता है।
अच्छा लगे तो लाइक और शेयर करें
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एक स्त्री एक दिन एक स्त्रीरोग
विशेषज्ञ के
पास के गई और बोली,
" डाक्टर मैँ एक गंभीर समस्या मेँ हुँऔर
मेँ
आपकीमदद चाहती हुँ । मैं गर्भवती हूँ, आप किसी को बताइयेगा नही मैने एक
जान
पहचान के सोनोग्राफी लैब से यह
जान लिया है
कि मेरे गर्भ में एक बच्ची है । मै पहले से
एकबेटी की माँ हूँ और मैं किसी भी दशा मे
दो बेटियाँ नहीं चाहती ।"
डाक्टर ने कहा,"ठीक है, तो मेँ
आपकी क्या सहायता कर सकता हु ?"
तो वो स्त्री बोली," मैँ यह चाहती हू
कि इस गर्भ को गिराने मेँ मेरी मदद करें ।"
डाक्टर अनुभवी और समझदार था।
थोडा सोचा और फिर बोला,"मुझे
लगता है कि मेरे
पास एक और सरल रास्ता है
जो आपकी मुश्किल को हल कर देगा।" वो स्त्री बहुत खुश
हुई..
डाक्टर आगे बोला, " हम एक काम करते
है
आप दो बेटियां नही चाहती ना ?? ?
तो पहली बेटी को मार देते है जिससे आप इस
अजन्मी बच्ची को जन्मदे सके और
आपकी समस्या का हल
भी हो जाएगा. वैसे
भी हमको एक बच्ची को मारना है
तो पहले वाली को ही मार देते है ना.?"
तो वो स्त्री तुरंत
बोली"ना ना डाक्टर.".!!!
हत्या करनागुनाह है पाप है और वैसे
भीमैं
अपनी बेटी को बहुत चाहती हूँ । उसको खरोंच
भी आती है तो दर्द का अहसास मुझे
होता है
डाक्टर तुरंत बोला, "पहले
कि हत्या करो या अभी जो जन्मा नही
उसकी हत्या करो दोनो गुनाह है पाप हैं ।"
यह बात उस स्त्री को समझ आ गई । वह
स्वयं
की सोच पर लज्जित हुई और
पश्चाताप करते हुए
घर चली गई । क्या आपको समझ मेँ आयी ?
अगर आई हो तो SHARE करके दुसरे
लोगो को भी समझाने मे मदद
कीजिये
ना महेरबानी. बडी कृपा होगी ।
हो सकता है आपका ही एक shareकिसी की सोच बदल दे..
और एक कन्या भ्रूण सुरक्षित, पूर्ण
विकसित
होकर इस संसारमें जन्म ले
-: बचपन में एक गन्दी आदत :-
बचपन में मेरी एक गन्दी आदत थी, मैं
पापा के पर्स से चुपके
से
कभी कभी पैसे निकाल लेता था। जब
दूसरी कक्षा में
था तो पापा के पर्स के सिक्के वाले हिस्से
से हर सोमवार
को एक रुपैया चुरा के स्कूल के बाहर खोमचे
वाले से WWF
के
पोस्ट-कार्ड खरीदता था।
धीरे धीरे मेरी आदत थोड़ी और बिगड़ी,
जब
पांचवी कक्षा में
था तो बगल में बैठने
वाली लड़की को महीने में एक बार
कैंटीन में
फाउंटेन पेप्सी और समोसा खिलने के लिए
नियमित तरीके
से 11
रुपये चुराने लगा।
...
पिता जी भी इतना ध्यान नहीं देते थे,
उनका पर्स
कभी ढंग से
नहीं रखा रहता था। नोट टेढ़े मेढे पड़े
रहते थे,
पापा कभी गिनते
भी नहीं थे की कितने पैसे हैं पर्स में।
मेरी ये आदत इस वजह
से
कभी टूटी नहीं।
जब मैं दसवी कक्षा में पहुंचा तो मेरे शहर में
पहली बार
मल्टीप्लेक्स खुला। सारे दोस्त लार्ड ऑफ़
द रिंग्स देखने
जा रहे थे। उस दिन मैंने पिता जी के पर्स
से सीधे
दो सौ रुपैये
मारे। फिल्म तो बहुत अच्छी थी, पर उस
दिन अचानक मुझे
लगा की मैं क्या गलत करता जा रहा हूँ।
तीन दिन तक मैंने पापा से नज़र तक
नहीं मिलायी।
पिता जी आज भी इतना ध्यान नहीं देते,
पर्स
अभी भी अस्तव्यस्त रहता है। आज
मेरी नौकरी लग
गयी है,
पिता जी के पर्स से आखिरी बार
पैसा चुराए हुए मुझे दस
साल
से ऊपर हो गए हैं।
अब मेरी नौकरी लग गयी है, और
कभी कभार
पापा की पर्स में
चुपके से एक पांच सौ का नोट डाल देता हूँ .
पापा को पता नहीं चलता, पर मुझे मन
ही मन बहुत सुकून
मिलता है।
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